Sabhyata Kya Hai, सभ्यता के प्रकार और उनकी जनजीवन और विशेषताए

आज हम यह जानेंगे के sabhyata kya hai, सभ्यता क्या है, सबसे पुरानी सभ्यता कौन सी है, sabhyata kitne prakar ki hoti hai, sindhughati sabhyata kya hai, के बारे में आपको स्टेपानुसार बताने वाले है.

sabhyata kya hai- सभ्यता क्या है-

सभ्यता शब्द “सभ्य” का विस्तार रूप है इसलिए सभ्यता को समझने से पहले हमें “सभ्य” शब्द को समझना होगा। व्यक्ति द्वारा मानवीय व्यवहारों के अनुरूप रहने के तरीके को “सभ्य” कहा जाता है.

यानी कि वह बौद्धिक क्षमता व व्यवहार जो मनुष्य को पशुओं से अलग बनाता हैं और मनुष्य को मनुष्य बनाता है को “सभ्य” कहा जाता है और इसी तरीके को समाज में लागू करने के लिए बनाई गई सामाजिक व्यवस्था “सभ्यता” कहलाती है।

सरल शब्दों में कहें तो एक मानवीय समूह द्वारा समाज में रहने के लिए जिन तौर तरीकों को अपनाया जाता है उन तौर तरीकों को सयुंक्त रूप से सभ्यता कहा जाता है।

सभ्यता एक जटिल मानव समाज है, जो आमतौर पर सांस्कृतिक और तकनीकी विकास की कुछ विशेषताओं के साथ विभिन्न शहरों से बना होता है।

दुनिया के कई हिस्सों में, प्रारंभिक सभ्यताओं का निर्माण तब हुआ जब लोग शहरी बस्तियों में एक साथ रहने लगे।

हालाँकि यह परिभाषित करना कि सभ्यता क्या है, और कौन से समाज उस पदनाम के अंतर्गत आते हैं, आज के मानवविज्ञानियों के बीच भी एक गर्मागर्म तर्क है

सभ्यता की विशेषताएं अथवा लक्षण (sabhyata ki visheshta)-

सभ्यता के प्रमुख लक्षण या विशेषताएँ निम्नलिखित है–

  1. आवश्यकताओं की पूर्ति का साधन

आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु मानव द्वारा सभ्यता के विभिन्न साधनों का उपयोग किया जाता है। दूसरे शब्दों में, यह कहा जा सकता है कि सभ्यता मानव की किसी न किसी आवश्यकता की पूर्ति करती है।

  1. परिवर्तनशील

मानव की आवश्यकताओं में वृद्धि के साथ-साथ परिवर्तन होता रहता है। इसके परिणामस्वरूप आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाले साधनों में भी परिवर्तन होता जाता है।

जैसे पहले ठण्डे पानी के लिए मिट्टी के घड़े का इस्तेमाल होता था परन्तु आजकल कूलर या फ्रिज का इस्तेमाल किया जाता है।

  1. संचरणशील

सभ्यता में उपयोगिता का तत्त्व अधिक मात्रा में होता है। इसी कारण सभ्यता एक स्थान से दूसरे स्थान तक तीव्रता से फैल जाती है।

चाहे कोई दवाई हो या उन्नत ढंग का कपड़ा, जैसे ही किसी देश में इसका आविष्कार होता है शीघ्र ही उसका विश्व में इसका प्रसार हो जाता है।

  1. अग्रसर होना

सभ्यता निरंतर आगे बढ़ती रहती है। अगर यातायात के साधनों को देखें तो पता चलता है कि प्रत्येक आविष्कार से गति की मात्रा बढ़ी है।

पहले बैलगाड़ी, फिर मोटर व रेलगाड़ी और आजकल ध्वनि के वेग की गति से भी तेज उड़ने वाले विमानों का आविष्कार हो चुका है।

  1. बाह्य आचरणों से संबंधित

सभ्यता मानव के बाहरी आचरणों से सम्बन्धित होती है।

समाज में जो बाहरी आचरण किया जाता है वह सभ्यता का परिचायक माना जाता है। उदाहरणार्थ, हमारे कपड़े हमारी सभ्यता के परिचायक हैं।

  1. प्रविधियों से सम्बन्धित

सभ्यता के अन्तर्गत मानव जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाले उपकरणों का समावेश होता है।

  1. भौतिक स्वरूप

सभ्यता का स्वरूप भौतिक होता है। इसको देखा व स्पर्श किया जा सकता है। इस संसार में जितने भी भौतिक उपकरण एवं साधन है, जोकि हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति से सम्बन्धित हैं, उन्हें हम सभ्यता के अन्तर्गत ही रखते हैं।

  1. सभ्यता साधन है, साध्य नहीं

सभ्यता हमारी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति का साधन मात्र है साध्य नही हैं।

सबसे पुरानी सभ्यता कौन सी है-

सुमेरियन सभ्यता मानव जाति के लिए ज्ञात सबसे पुरानी सभ्यता है। सुमेर शब्द का प्रयोग आज दक्षिणी मेसोपोटामिया को निर्दिष्ट करने के लिए किया जाता है।

3000 ईसा पूर्व में, एक समृद्ध शहरी सभ्यता मौजूद थी। सुमेरियन सभ्यता मुख्यतः कृषि प्रधान थी और उसका सामुदायिक जीवन था।

sabhyata kitne prakar ki hoti hai-सभ्यता के प्रकार-

विश्व की सभी प्राचीन सभ्यता नदीयों के किनारे पनपी थी. जैसे सिन्धु नदी के तट पर सिन्धुघाटी सभ्यता. जिसे हरप्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है.

मिस्र की नदी के तट पर बसी मेसपोटामिया या मिस्र की सभ्यता. इसके अलावा माया सभ्यता, चीन की सभ्यता, नील नदी की सभ्यता आदि विश्व की प्राचीनतम प्रकार की सभ्यताए है.

sindhughati sabhyata kya hai-सिन्धुघाटी (हडप्पा) सभ्यता की विशेषताए-

सिन्धुघाटी सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओ में से एक है. यह प्राचीन काल में बहने वाली नदी सिन्धु नदी के तट पर बसी थी. इस कारण इसे सिन्धुघाटी सभ्यता कहा गया.

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इसे हडप्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है. क्योंकि 1921 में इस क्षेत्र में सर्वप्रथम खोजा गया शहर हडप्पा ही था. इस सभ्यता का उद्भव तम्रपाषण काल में भारतीय उपमहाद्वीप के उतर-पश्चिम भाग में हुआ था.

यह सभ्यता एक नगरीय सभ्यता थी.

इसका विस्तार उतर में जम्मू से लेकर दक्षिण में गुजरात तक और पश्चिम मे बलुचिस्तान से लेकर उतर प्रदेश के मेरठ तक था.

हडप्पा सभ्यता से प्राप्त महत्वपूर्ण स्थल निम्नलिखित है. हडप्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल, धौलावीरा, राखीगढ़ी, कालीबंगा, रोपड़ आदि स्थल मिले है.

हडप्पा सभ्यता का सामाजिक एवं धार्मिक जीवन कैसा था ? हडप्पा सभ्यता में समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार होती थी.

समाज मुख्यतोर पर मातृसत्तात्मक था. प्राप्त साक्ष्यो के आधार पर यह मातृदेवी की पूजा की जाति थी. इसके अलावा हडप्पा कालीन लोग पशुपति देवता, लिंग, योनि,पशुओ तथा वृक्षों की पूजा करते थे. साथ ही वे टोने-टोडके, तंत्र-मंत्र, ताबीज आदि पर विश्वास रखते थे.

हडप्पा सभ्यता नगर योजना-

यह सभ्यता अपने नगर नियोजन प्रणाली, जल निकासी प्रणाली और सफाई के लिए जानी जाती है. शहर दो भागो में विभक्त था. एक को दुर्ग कहा जाता था.

जहा आमतोर पर शासक, उच्च और कुलीन वर्गीय लोग रहते थे. जबकि दूसरा शहर के निचले भाग में था. जहा सामान्य जनता निवास करती थी.

hadappa sabhyata kya hai

सड़के ग्रिड प्रणाली पर आधारित जो एक दुसरे को समकोण पर काटती थी. आमतोर पर प्रत्येक घर में आँगन, जल के स्रोत के रूप में एक कुआं, एक रसोईघर और एक स्नानघर था.

घरो के दरवाजे मुख्य सड़क के सामने न खुलकर गली की ओर होते थे. घरो के निकट छोटी-छोटी नालीया जो मुख्य सड़क के पास बड़े नाले में मिलती थी. इस प्रकार हडप्पा सभ्यता का नगर नियोजन सुव्यवस्थित था.

हडप्पा सभ्यता का आर्थिक जीवन –

यह सभ्यता मुख्यतोर पर नगरीय थी. परन्तु यहा कृषि, पशुपालन और व्यापार किया जाता था. वस्तुओं का आदान प्रदान विनिमय द्वारा होता था.

यहाँ के लोग गेहु, जों, राइ, मटर आदि की खेती करते थे. लोथल नामक स्थल से चावल की खेती के साक्ष्य भी मिले है. इस सभ्यता के लोग बैल, भेस, बकरी, भेड़, कुत्ते, सुअर तथा बिल्ली पालते थे. साथ ही ये लोग हाथी तथा गेंडे से भी परिचित थे.

सिन्दुघाटी सभ्यता के लोगो के जीवन में व्यापार का अधिक महत्त्व था. वे पत्थर, धातु, धातु तथा हड्डीयों से बने मनको का व्यापार करते थे.

इस सभ्यता से लिपि भी मिली है जिसे अभी तक पढ़ा नही जा सका है. यहा की लिपि चित्रात्मक थी जो दायी से बाई ओर लिखी जाति थी.

हडप्पा सभ्यता का अंत – हडप्पा सभ्यता के विनाश के बारे में अलग अलग इतिहासकारो का अलग-अलग मत है. कोई मानता है इसका विनाश प्रकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, अकाल या भूकंप से हुआ है.

लेकिन कुछ इसके अंत का कारण बाहरी आक्रमण को मानते है. ( सभ्यता क्या हैं )

हडप्पा सभ्यता के बारे में अधिक पढ़ने के लिए यहा पर क्लिक करे- हद्दपा संस्कृति और सभ्यता की हिस्ट्री

वैदिक सभ्यता- vaidik sabhyata kya hai-

इतिहासकारो ने वैदिककाल को दो भागो में बाँटा है. एक ऋग्वेदिक काल (1500-1000) ईसा पूर्व और दूसरा उत्तर वैदिक काल (1000-600) ईसा पूर्व. आर्यों द्वारा स्थापित यह सभ्यता एक ग्रामीण सभ्यता थी.

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सर्वप्रथम आर्य पंजाब और अफगानिस्तान के क्षेत्रो में बसे थे. आर्यों के नाम पर ही इसका नाम वैदिक सभ्यता पड़ा. आर्यन संस्कृत के ज्ञानी थे. वैदिक सभ्यता से ही हिन्दू धर्म का सूत्रपात हुआ है.

वैदिक सभ्यता के स्रोत हमें वेदों से मिलते है. वेद मूलरुप से चार ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अर्थवेद है. वेदों को आज भी हिन्दू धर्म में पवित्र ग्रंथ माना जाता है.

इन चारो वेदों में ऋग्वेद सबसे प्राचीन है.संस्कृत भाषा में लिखित इन वेदों में वैदिक सभ्यता की सम्पूर्ण जानकारी मिलती है.

धार्मिक जीवन– ऋग्वैदिक काल में एकेश्वरवाद प्रचलन में था. अथार्त एक ही ईश्वर को मानते थे. जबकि उत्तरवैदिक काल में बहुदेवतावाद प्रचलित था. यानी बहुत सारे ईश्वर को मानते थे.

ऋग्वेद में 33 देवी-देवताओ का वर्णन मिलता है. वैदिककाल में यज्ञों की महत्वता बहुत अधिक थी. जैसे अश्वमेघयज्ञ जिसमे अश्व(घोड़े) की बलि दि जाती. तथा पुरुषमेघ यज्ञ जिसमे पुरुष की बलि दी जाती, आदि प्रचलन में थे.

आर्थिक जीवन– वैदिक सभ्यता का आर्थिक जीवन कृषि और पशुपालन पर निर्भर था. यहा की मुख्य फसल यव थी. व्यापर अत्यंत सीमित था. ये लोग तांबे और कांसे से परिचित थे.

घरेलु उद्योगों का चलन था जैसे बढई, कुम्हार, चर्मकार, वस्त्र-बुनाई एवं दरी उद्योग आदि. वैदिक सभ्यता का अंत- वैदिक सभ्यता के अंत के बाद महाजनपदो का निर्माण हुआ. इसके बाद वैदिक सभ्यता का प्रभाव कम हो गया.

मिस्र की सभ्यता क्या है – mishtra ki sabhyata kya hai-

इस सभ्यता को नील नदी की सभ्यता भी कहा जाता है. यह सभ्यता विश्व की सबसे लम्बी नदी नील के तट पर विकसित हुई थी. जो कि अफ्रीका महाद्वीप में स्थित है.

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मिस्र सभ्यता अपने-आप में काफी रोचक और रहस्यमई है. मिस्र का इतिहास 3400 ईसा पूर्व से भी पुराना रहा है. संभवतः इस सभ्यता को सर्वप्रथम इथियोपिया, नूबी और नीलियम जातियों ने जन्म दिया.

मिस्र सभ्यता तीन कालखंड पिरामिड काल, सामंतशाही काल और साम्राज्यवादकाल में बटीं है. जिसमे पिरामिड काल सर्वाधिक रोचक एवं गौरवपूर्ण रहा था.

सामाजिक जीवन-
मिस्र सभ्यता में निरंकुश राजतंत्र चलता था. राजा का पद वंशानुगत होता था. सामंत और पुरोहितों की सहायता से राजा राज्य शासन संचालित करता था.

मिस्र की जनता राजा को ईश्वर का प्रतिनिधि मानती थी. प्राचीन मिस्र में समाज कई वर्गों में बांटा था. जैसे राजवंश, पुरोहित, सामंत यह सभी उच्च वर्ग के थे.

व्यापारी मध्यमवर्ग जबकि किसान, दास एवं अन्य निम्न वर्ग में आते थे. प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर यह माना जाता है कि, यहां के लोग मनोरंजन के लिए नृत्य, संगीत, नटवाजी, पशु खेल, जुआ आदि करते थे.

धार्मिक जीवन-
मिस्र वासी आस्तिक थे अथार्त ईस्वर को मानते थे. ये लोग सूर्य पूजा को अधिक महत्व देते थे. तथा सूर्य, नदिया और चंद्रमा को प्राकृतिक शक्तियों का प्रतीक मानते थे.

आर्थिक जीवन- मिस्र वासी कृषि, पशुपालन के अलावा व्यापार भी करते थे. यहां के लोग धातु, लकड़ी, मिट्टी एवं कांच और कपड़े के काम में कुशल थे. ऐसे घरेलू उद्योग शुरू हुए.

व्यापार संभवत वस्तु विनिमय द्वारा होता था. उस समय अरब और इथोपिया इस के निकटवर्ती व्यापारिक केंद्र थे.

निकर्ष-

  • जैसा की आज हमने आपको के sabhyata kya hai, सभ्यता क्या है, सबसे पुरानी सभ्यता कौन सी है, sabhyata kitne prakar ki hoti hai, sindhughati sabhyata kya hai, के बारे में आपको बताया है.
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