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Printer, Plotter Kya Hai, Printer Kitne Prakar Ke Hote Hain, Printer से जुडी जानकारी.

आज हम जानेंगे की मोबाइल और कंप्यूटर से Printer Kya hai, Printer kitne prakar ke hote hain, Plotter kya hai, Plotter kitne Prakar ke hote hai, जिसकी पूरी प्रोसेस हम Step By Step Process आपको बताने वाले है

Printer Kya Hai (What is Printer in Hindi?)-

Printer kya hai or printer kitne prakar ke hote hain इसके बारे में हम आपको बताने से पहले हम आपको एक साधरण सी जानकारी देंगे, प्रिंटर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाईस है जिसका उपयोग डिजिटल सूचना को कागज पर छापने के लिए किया जाता हैं. यह कम्प्युटर का बाहरी आउटपुट डिवाईस होता है. जो कम्प्युटर में सॉफ्ट कॉपी को हार्ड कॉपी में परिवर्तित करने का काम करता हैं.

प्रिंटर किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में स्टोर किये गए डाटा को (यह डाटा ईमेज, टेक्स्ट रूप में हो सकता हैं) एक पेज में प्रिंट करता है, यह पेज साइज के अनुसार छोटा या बड़ा हो सकता है. तथा जिससे हम उस प्रिंट किए गए पेज का उपयोग अनेक कार्यों के लिए कर सकते है.

आमतौर पर प्रिंटर कंप्यूटर के साथ कार्य करता है, और उसे केबल के द्वारा जोडा जाता हैं. परंतु वर्तमान समय में अनेक डिजिटल डिवाइस प्रिंटर फ़ीचर्स को सपोर्ट करते हैं, जिससे दूर बैठे प्रिंटर का इस्तेमाल किया जा सकता है. और ब्लुटूथ, वाई-फाई, क्लाउड तकनीक से प्रिंट कर सकते हैं.

Printer ka Avishkar kisne kiya Hai ?

Computer Printer का इतिहास (History) लगभग 1938 के आस-पास शुरू हुआ जब Chester Carlson ने Electrophotography नाम की एक dry printing process का अविष्कार किया था.

हालांकि कई वेबसाइट और किताबों में इसके इतिहास को 1800s से शुरू किया जाता है जब Charles Babbage ने अपना पहला Mechanical printer डिज़ाइन किया जिसे Difference Engine के साथ उपयोग किया गया.

printer ke janak (1)

सन 1953 में Remington Rand द्वारा Univac computer के लिए एक high-speed printer पेश किया गया, ये बहुत बड़ी और भारी मशीन थी जिसका उपयोग केवल आधुनिक कार्यालयों में किया जाता था.

हालांकि उस समय तक printing के लिए Typewriters एक अच्छा तरीका थे. लेकिन इसमें उपयोगकर्ता को एक paper print करने के लिये कई processes से गुजरना होता था.

प्रिंटर का इतिहास – (Printer Ki History)-

पहला कम्प्युटर प्रिंटर 19वीं शताब्दी में कम्प्युटर के पितामह मा. Charles Babbage ने अपने Difference Engine के लिए डिजाईन किया था. मगर 20वीं शताब्दी तक भी यह डिजाईन नही बन पाया था.

जापान की कंपनी Epson ने वर्ष 1968 में EP-101 नामक पहला इलेक्ट्रॉनिक प्रिंटर का आविष्कार किया. ये शुरुआती प्रिंटर आमतौर पर टाईपराईटर तथा टेलीटाईप मशीन का संकर होते थे.

प्रिंटर की स्पीड में बढ़ती माँग के कारण विशेषकर कंप्यूटर उपयोग के लिए प्रिंटर सिस्टम के विकास की ओर कार्य किया गया. तथा कुछ वर्षों के बाद 1984 में कम कीमत का HP Laser Jet को लॉन्च किया गया.

परन्तु 2000 तक आते-आते इंटरनेट धीरे-धीरे विश्व भर में लोगों तक पहुँच रहा था. जिससे ईमेल का उपयोग कर दस्तावेज (डॉक्यूमेंट) के आदान प्रदान किया जा सकता था तथा प्रिंटिंग की आवश्यकता में कमी लाने सहायता मिली.

वर्ष 2010 में 3D प्रिंटिंग आकर्षण का केंद्र बन गया. जिससे 3D ऑब्जेक्ट को सरल बना दिया हैं.  परन्तु वर्तमान समय मे यह प्रिंटिंग डिवाइस पूरी तरह से विकसित नहीं हुए हैं, जिस कारण इनकी पहुँच काफी कम है.

Printer Kitne Prakar Ke Hote Hain?Types of Printer

कंप्यूटर Printer को 2 प्रकार के होते है.
  1. Impact Printer
  2. Non Impact Printer

1-Impact Printer kitne prakar ke hote hai

Impact Printer वह प्रिंटर है जो अपना Impact छोड़ते है जैसे टाइपराइटर प्रिंटिंग की विधि भी इसके जैसे होती है.

इसमें एक Print Head होता है जो कागज व Ribbon से टकराता है जिससे Impact प्रिंटिंग में अक्षर कागज पर छप जाते है.
ये प्रिंटर समान्य प्रिंटर की तुलना में अधिक आवाज़ करते है और इन्हें उन्ही Business के अंदर प्रयोग किया जाता है जहाँ Multipart प्रिंट होता है.
इसकी विशेषताएं

  • ये प्रिंटर की लगत बहुत सस्ती होती है.
  • यह आवाज़ बहुत करते है.
  • Multi Printing के लिए बहुत फायदेमंद है.

Impact Printer के प्रकार-

  • Dot Matrix Printer
  • Line Printer
  • Daisy Wheel Printer
  • Chain Printer
  • Drum Printer

1-Dot Matrix Printer

printer kitne pakar ke hote hain dotmerix (1)

इस प्रिंटर में Print Head Move करता है इसमें Pins का एक मैट्रिक्स होता है और हर पिन के Ribbon और पेपर पर एक डॉट छप जाता है और अनेक डॉट मिलकर एक Character बनाते है और सभी Character Pins के Group का उपयोग करके बनाये जाते है.

Dot Matrix Printer चलने में Slow होते है और प्रिंटिंग के वक़्त शोर भी बहुत करते है. इनकी Quality बाकि के मुकाबले थोड़ी कम होती है.

Dot Matrix Printer के फायदे

  • Dot Matrix Printer की लागत कम होती है.
  • Dot Matrix Printer की Cost कम होती है इसलिए इनको खरीदना और प्रयोग करना आसान है.

Dot Matrix Printer के नुकसान

  • Dot Matrix Printer की Print Quality बहुत कम होती है.
  • यह प्रिंटर चलने में बहुत शोर करते है.
  • Ink Jet प्रिंटर की तुलना में Dot Matrix Printer की Speed कम होती है.
  • Pin Head की Break होने की सम्भावना होती है.

2- Line Printer

printer kya hai (1)

Line Printer भी Impact Printer है. ये Printer पूरी लाइन एक बार में में छाप सकता है. इस Printing की Cost भी कम होती है. इस प्रिंटर को बार Printer भी कहाँ जाता है.

Line Printer के छापने की Speed 300 से 3000 लाइन प्रति मिनिट होती है. इन प्रिंटर का प्रयोग Mini और Main Frame कंप्यूटर में बड़े कार्यो के लिए किया जाता है.

Line Printer के फायदे-

  • ये Printer Fast Speed से प्रिंट निकालते है.
  • Line Printer में आवाज़ कम होती है क्योंकि ये प्रिंटर एक कैबिनेट में सलग्न होते है.

Line Printer के नुकसान-

  • ये प्रिंटर केवल Black Ink से ही Printer निकल सकते है.

3- Daisy Wheel Printer

printer kitne pakar ke hote hain (1)

Daisy Wheel Printer भी टाइपराइटर के समान ही है ये प्रिंटर केवल Character और Symbol प्रिंट कर सकते है. यदि ग्राफ़िक प्रिंट करना हो तो ये प्रिंटर नही कर सकते.

इन Printer की Printing Speed 10 से 75 Character प्रति सेकंड होती है. लेज़र और Inkjet प्रिंटर की कीमतों में कमी होने के कारण और डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर की Quality में सुधार होने से Daisy Wheel Printer अब अप्रचलित हो गये है.

Daisy Wheel Printer के फायदे-

  • Maintenance Cost कम है.
  • Running Cost कम है.
  • यूनिट Cost भी कम है.

Daisy Wheel Printer के नुकसान-

  • इस Printers की Resolution कम है.
  • ये प्रिंटर आवाज़ बहुत करते है.
  • Ribbon को बदलना पड़ता है.

4-Drum Printer

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जैसा कि इसके नाम से पता चलता है कि इस प्रिंटर में एक ड्रम होता है और ये ड्रम फ़ास्ट Speed से घूमता है. जिसकी सतह पर Character उभरे हुए रहते है. इसमें बैंड का एक सेट होता है ऐसे अनेको बैंड पुरे Drum पर होते है जिससे पेपर पर लाइन की हर स्थिति में Character प्रिंट किये जाते है.

एक Rotation में ये एक बार लाइन प्रिंट करता है इस प्रिंटर की Speed 300 से 2000 Character प्रति मिनट की होती है.

5- Chain Printer

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इस प्रिंटर में तेज Speed से घुमने वाली एक चैन होती है जिसे प्रिंट चैन कहा जाता है. ड्रम प्रिंटर की तरह ये प्रतेक Print Position के लिए हैमर होता है. जिससे हैमर पेपर पर टकराकर एक बार में एक लाइन प्रिंट करता है.
Chain प्रिंटर में चैन Rotate होती रहती है जब तक लाइन पर प्रिंट Position नही आ जाती.

2.-Non-Impact Printer kitne prakar ke hote hai

इन प्रिंटर में Print Head के साथ कोई कनेक्शन नही होता. इसमें Printing Laser Technique के द्वारा की जाती है. इनकी Printing की Quality भी बहुत Clear होती है और बिलकुल भी आवाज़ नही करते. इन Printers की Cost Impact प्रिंटर की तुलना में ज्यादा होती है.

But इसके रिजल्ट उसके According बहुत ही ज्यादा अच्छे होते है. इन Printers की Help से हम Graphics Printing भी आराम से कर सकते है.

Non-Impact Printer के प्रकार-

  • Laser Printer
  • Inkjet Printer
  • Thermal Printer
  • Multi Functional Printer
  • Photo Printer

1- Laser Printer

printer kitne prakar ke hote hain leser (1)

Laser प्रिंटर एक Non Impact प्रिंटर है जिसका प्रयोग 1970 के दशक से हो रहा है. Mainframe कंप्यूटर में इनका प्रयोग किया जाता था. ये प्रिंटर Photostate Machine की तरह वर्क करता है.

वर्तमान में Laser Printer अधिक लोकप्रिय है क्योंकि ये प्रिंटर बहुत फ़ास्ट Speed से काम करते है और बेस्ट Quality से Print निकालते है.

Laser Printer में माइक्रो Processor, RAM और ROM का भी प्रयोग किया जाता है.

ये प्रिंटर भी डॉट्स के द्वारा ही पेपर पर Print करता है. लेकिन Dots इतने Small होते है कि प्रिंट पेपर पर Dots दिखाई नही देते. इन Printers के अंदर Cartridge का इस्तेमाल किया जाता है. जिसके अंदर Ink Powder डाला जाता है. और ये Ink Powder Liquid नही होता बल्कि Dry (सुखा) होता है.

Laser Printer की Resolution 300 से 1200 DPI तक होती है. Colored Printers भी Best Quality के Print देता है क्योंकि इसमें Special टोनर होता है और अलग अलग Color Available होते है. Colored प्रिंटर Costly ज्यादा होते है और इनकी Printing भी महंगी पड़ती है.

Laser Printer के फायदे

  • Inkjet Printer की तुलना में अधिक Effective होते है.
  • Laser Printer की Speed बहुत ज्यादा होती है.
  • Paper Capacity Higher होती है.
  • Inkjet Printer की तुलना में Printing सस्ती होती है.a

Laser Printer के नुकसान

  • इनको चलाने के लिए हाई वोल्टेज की जरूरत होती है.

2- Inkjet Printer

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Inkjet Printer Office और घरो के लिए प्रयोग होने वाले बेस्ट प्रिंटर है क्योंकि इनकी Printing Quality और उचित लागत भी है. इस प्रिंटर में Nozzle से पेपर पर Ink की बूंदों से Character और Graphics प्रिंट किये जाते है.

इन Printers को CMYK प्रिंटर भी कहते है क्योंकि इसमें नीलम, Red, Yellow और Black Color से मिलकर किसी भी Color को अपने पेपर पर प्रिंट करवा सकते है. इसीलिए इन प्रिंटर का प्रयोग Colored प्रिंटर के लिए होता है.

Inkjet Printer की Printing Quality 300 DPI होती है. इसकी Speed Normally 250 Characters Per सेकंड होता है.

3- Thermal Printer

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इन Printers का प्रयोग ज्यादातर Business और दुकानों पर किया जाता है. इसमें वैक्स आधारित Ribbon से अक्षरों को पेपर पर प्रिंट किया जाता है. इन प्रिंटर में जो प्रिंट होता है उसे ज्यादा देर तक नही रख रखते मतलब वो कुछ टाइम के बाद प्रिंट किया गया Matter Clear हो जाता है.

इस Printers का इस्तेमाल ATM मशीनों में होता है. ये प्रिंटर महंगे होते है But इनका प्रयोग करना बेहद आसान है.

4-Multi-Functional Printer

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ये एक ऐसा Non Impact प्रिंटर है जिसका प्रयोग हम Inkjet और Laser दोनों के लिए करते है. इसे All-In-One प्रिंटर भी कहा जाता है. इन प्रिंटर की वर्तमान में बहुत Demand रहती है क्योंकि इसमें एक से अधिक कार्य कर सकते है जैसे Printing, फैक्स, स्कैनिंग इत्यादि.

ये एक ऐसी Machine है जिसके द्वारा Print, Scan, और फैक्स किये जा सकते है ये आजकल घरेलू कार्य के लिए भी प्रयोग होने लगा है. वर्तमान में तो ऐसे प्रिंटर भी आ गये है जो डिजिटल कैमरा से कंप्यूटर का प्रयोग करके सीधे प्रिंट निकाल सकता है.

Printer Kaise kam Karta Hai-

Printer kitne prakar ke hote hain or Printer kaise kam Krta hai उसके बारे में आपको बनाते जा रहे है. हमने आपको कई प्रकार के प्रिंटरो के बारे में बताया जिनके कार्य करने का तरीका एक-दूसरे से भिन्न होता है. अभी हम laser printer कैसे काम करता है? इस बारे मे जानेंगे. क्योंकि आज के समय ये आपको हर जगह दिखाई देगा. एक Laser printer काफी हद तक photocopiers machine की तरह होते है यानी इनकी printing technology लगभग same ही होती है.

1. जब आप कुछ print करते है, तो सबसे पहले आपके computer द्वारा प्रिंट किये जाने वाले electronic data (information) को laser printer तक sent किया जाता है.

2. दूसरे चरण में Printer में मौजूद एक electronic circuit ये पता करता है कि इस data का मतलब क्या है और इसे paper पर कैसे print करना है ताकि पृष्ट पर सही जानकारी दिखाई दे.

3. अगले चरण में electronic circuit द्वारा corona wire को activate किया जाता है. ये एक high voltage wire है, जो इसके आस-पास मौजूद किसी भी चीज को एक static electric charge देता है.

4. इसके बाद corona wire द्वारा charge किया जाता है photoreceptor drum को, जिससे drum एक positive charge gain करता है और वह चार्ज इसके पूरे surface पर फैल जाता है.

5. उसी समय electronic circuit द्वारा laser beam को भी activate किया जाता है, ताकि page की image को drum पर draw किया जा सके. ये laser beam drum के जिस हिस्से पर hit करती है, वहाँ मौजूद positive charge मिटता है और इसके स्थान पर negative charge create होता है. ऐसा करने से drum पर पूरे page की image प्रदर्शित होने लगती है.

6. Image का pattern set होने के बाद, drum को सकरात्मक रूप से चार्ज powered ink (toner) के छोटे-छोटे particles से coat किया जाता है. टोनर ड्रम के सकारात्मक रूप से चार्ज हिस्से को छोड़कर नकारात्मक चार्ज वाले स्थान पर चिपक जाता है.

7. अब Printer के दूसरी तरफ से paper sheet को drum के पास लाया जाता है. जैसे-जैसे यह आगे बढ़ता है paper को एक अन्य corona wire की मदद से एक strong negative electrical charge दिया जाता है.

8. जैसे ही paper, drum के पास में पहुँचता तो इसका negative charge ड्रम में मौजूद positive रूप से charge toner particles को attract करता है. जिससे image को drum से paper sheet पर transfer किया जाता है.

9. अंत मे paper की सतह पर मौजूद toner particles को fuser unit की मदद से fuse किया जाता है जिससे वह स्थायी रूप से कागज पर चिपक जाते है. इस तरह से आपको उस document का printout प्राप्त होता है.

प्रिंटर बनाने वाली कंपनी (Printer manufacture company):

Printer kitne prakar ke hote hain– सभी प्रकार के प्रिंटर विभिन्न आकारों और विशेषताओं में उपलब्ध है. यह कई कंपनियों द्वारा बनाए जाते हैं. जैसे – HP, Canon, Epson, Ricoh, Dell, Samsung, Panasonic, Xerox, Toshiba इत्यादि.

Plotter Kya Hai in hindi, प्लॉटर क्या हैं -(What is Plotter)-

Plotter Kya Hai- प्लॉटर एक कंप्यूटर हार्डवेयर डिवाइस है जो प्रिंटर की तरह होता है जो वेक्टर ग्राफिक्स को प्रिंट करने के लिए उपयोग किया जाता है।

टोनर के बजाय, प्लॉटर पारंपरिक प्रिंटर की तरह डॉट्स की एक श्रृंखला के बजाय कागज पर निरंतर लाइनों को खींचने के लिए एक पेन, पेंसिल, मार्कर, या किसी अन्य लेखन डिवाइस का उपयोग करता हैं।

प्लॉटर एक प्रिंटर की तुलना में बड़े ग्राफिक्स प्रिंट कर सकता है।

प्लॉटर का अविष्कार 1953 में रेमिंगटन-रैंड द्वारा किया गया था। इसका उपयोग तकनीकी चित्र बनाने के लिए UNIVAC कंप्यूटर के साथ संयोजन में किया गया था।

Plotter एक आउटपुट डिवाइस हैं इससे चित्र (Drawing), चार्ट (Chart), ग्राफ (Graph) आदि को प्रिंट किया जा सकता हैं यह 3D Printing भी कर सकते हैं इसके द्वारा बैनर पोस्टर आदि को प्रिंट किया जा सकता हैं|

यहाँ पर toner के जगह में, plotters इस्तमाल करते हैं एक pen, pencil, marker, या कोई दूसरा writing tool जिससे की वो draw कर सकें multiple, continuous lines paper के ऊपर, न की एक series of dots जैसे की एक traditional printer में होता है.

एक समय था जब इसका बहुत ज्यादा इस्तमाल हुआ करता था computer-aided design (CAD) के तोर पर, लेकिन अब इन devices का इस्तमाल थोडा कम हो गया है क्यूंकि इनके स्थान पर wide-format printers का इस्तमाल होने लगा है.

Plotters का इस्तमाल schematics के hard copy बनाने के लिए होता है और साथ में दुसरे similar applications के लिए भी.

“Plotter एक ऐसा आउटपुट डिवाइस हैं जो चार्ट (chart), ग्राफ (Graph), चित्र (Drawing), रेखाचित्र (Map)
आदि को हार्ड कॉपी पर प्रिंट करता हैं ”

Plotter Kitne Prakar ke Hote Hai-(Types of Plotter)-

  • Drum pen Plotter
  • Flat bed Plotter

1.Drum Pen Plotter

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यह एक ऐसा Plotter हैं जिसमे आकृति बनाने के लिए पेन का प्रयोग किया जाता हैं पेन के द्वारा कागज पर चित्र या आकृति का निर्माण किया जाता है.

इस डिवाइस में कागज एक ड्रम के ऊपर चढ़ा रहता हैं जो धीरे धीरे खिसकता जाता है और पेन प्रिंट करता जाता हैं यह एक मैकेनिकल कलाकार की तरह कार्य करता हैं.

कई Drum Pen Plotter में Fiber Tipped pen का प्रयोग होता है यदि उच्च क्वालिटी की आवश्यकता हो तो Technical Drafting Pen का प्रयोग किया जाता हैं कई रंगीन प्लॉटर में चार या चार से अधिक पेन होते हैं प्लॉटर एक आकृति को इंच प्रति सेकंड में प्रिंट करता हैं|

2.Flat bed Plotter

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फ्लैट बेड प्लॉटर में कागज को स्थिर अवस्था में एक बेड या ट्रे में रखा जाता हैं इसमें एक भुजा पर पेन लगा रहता हैं जो मोटर से कागज पर ऊपर-नीचे (Y-अक्ष) और दाये-बाये (X-अक्ष) पर घूमकर चित्र या आकृति का निर्माण करता हैं इसमें पेन कंप्यूटर से नियंत्रित होता हैं|

Printer or plotter me kya antar hai?

1. Plotters असल में एक sub category होता है printers का.

2. सभी plotters को हम printers मान सकते हैं, लेकिन सभी printers को हम plotters नहीं कह सकते हैं.

3. Plotters का इस्तमाल line images draw करने के लिए होता है, वहीँ printers का इस्तमाल dots के द्वारा images draw करने के लिए होता है.

4. एक plotter hold करता है pen और draw करते हैं lines, वहीँ printers laser technology का इस्तमाल करते हैं.

5. एक plotter का इस्तमाल हम बहुत ही बड़े images को draw करने के लिए कर सकते हैं जैसे की architecture में, वहीँ printers का इस्तमाल हम ज्यादा बड़े images के लिए नहीं कर सकते हैं.

Plotter kya kam aata hai-

अब चलिए Plotters के applications के विषय में जानते हैं. आखिर प्लॉटर का क्या उपयोग है?

1. इनका इस्तमाल building के Architectural plan बनाने के लिए होता है.

2. इन्हें CAD applications में भी बहुत इस्तमाल किया जाता है, जिससे aircraft के mechanical components को आसानी से design कर सकें.

3. साथ में इन्हें बहुत से engineering applications में भी इस्तमाल किया जाता है.

Conclusion-

  • जेसा की आज हमने आपको Printer kitne prakar ke hote hain इसकी सारी प्रक्रिया बताई है की केसे हम Printer Kya Hai, Printer kitne prakar ke hote hain, Plotter Kitne Prakar Ke Hote Hain, Plotter kya hai in hindi, Plotter or Printer me kya antar hai के बारे में आपको बताया है.
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