Diode Kya Hai, Diode के प्रकार, उपयोग और Diode कैसे काम करता है.

आज हम यह जानेंगे के Diode Kya Hai, , Diode की खोज किसने की, Diode खोज कब हुयी थी, Diode कितने प्रकार के होते है, Diode कैसे काम करता है, Diode के उपयोग क्या है के बारे में आपको स्टेपानुसार बताने वाले है.

Diode Kya Hai-

Diode एक two-terminal electronic component है. जो मुख्य रूप से एक दिशा में बिजली का संचालन करता है. इसके एक सिरे पर उच्च प्रतिरोध और दूसरे सिरे पर कम प्रतिरोध होता है

Diode का उपयोग Voltage को सीमित करके Circuit की सुरक्षा के लिए और Alternating Current (AC) को Direct Current (DC) में बदलने के लिए किया जाता है.

डायोड P Type तथा N Type Semi-Conductor Material (Silicon या Germanium) से बना एक इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्पोनेन्ट है जो इलेक्ट्रिक करंट को केवल एक ही दिशा में फ्लो होने कि अनुमति देता है, जिस कारण इससे पार होकर आगे फ्लो होनेवाले करंट हमेशा DC होते है।

एक सिंगल डायोड के आधे हिस्से में Positive Type Charge Carrier Particle होते है और आधे हिस्से में Negative Type Charge Carrier Particle होते है।

इन दोनों के कॉम्बिनेशन से बीच में एक Potential Barrier उत्पन्न होता है जिसे Depletion Region कहा जाता है और इसी Depletion Region की कंडीशन पर निर्भर करता है कि इससे होकर करंट फ्लो होगी अथवा नहीं।

एक सिंगल PN Junction डायोड में दो टर्मिनल होते है जिसकी Positive साइड के हिस्से को Anode तथा Negative साइड का हिस्से को Cathode कहा जाता है।

Diode की खोज किसने की-

पहली बार thermionic diodes के कार्य करने के सिद्धांत की खोज वर्ष 1873 में Frederick के द्वारा की गई थी। उन्होंने पाया कि एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट विकसित किया जा सकता है जिसका करंट एक ही डायरेक्शन में फ्लो करता हो, उसके बाद वर्ष 1880 में थॉमस एडिसन द्वारा एक बार फिर से इस सिद्धांत की दोबारा से खोज की गई।

Diode खोज कब हुयी थी-

उसके बाद भी आने वाले वर्षों तक इस कंपोनेंट् पर विभिन्न साइंटिस्ट द्वारा रिसर्च की गई और 1906 में पहली बार क्रिस्टल डायोड की मदद से रेडियो रिसीवर का निर्माण किया गया जिसे Greenleaf Whittier द्वारा 20 नवंबर 1906 को निर्मित किया गया।

Diode कितने प्रकार के होते है –

1- रैक्टिफायर डायोड (Rectifier Diode) –

यह एक साधारण P-N जंक्शन डायोड है इसका आधा भाग P टाइप सेमी कन्डक्टर से तथा आधा भाग N टाइप सेमी कन्डक्टर से मिलकर बना होता है। इसका उपयोग ए. सी. वोल्टेज की डी. सी. वोल्टेज में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है । इसीलिए इसे रैक्टिफायर डायोड कहते है। इसका प्रयोग बैटरी एलिमिनेटर बनाने तथा विभिन्न प्रकार की पावर सप्लाई सर्किट्स में किया जाता है ।

2- जीनर डायोड (Zener Diode) –

इसे जीनर या एवलांची डायोड भी कहते है। इसका कार्य डी. सीं. वोल्टेज रेगुलेट कराना होता है। जीनर डायोड रिवर्स बायस में कार्य करता है । जब रिवर्स वोल्टेज बढ़ायी जाती है तो एक निश्चित वोल्टेज पर डायोड ब्रेक डाउन कर जाता है तथा बहुत अधिक मात्रा में रिवर्स करंट प्रवाहित होती है इनका उपयोग वोल्टेज रेगुलेटर सर्किट्स में किया जाता है। ये विभिन्न वोल्टेज रेटिंग के प्राप्त होते है।

3- लाइट इमिटिंग डायोड (Light Emitting Diode)-

इन्हे L.E.D. भी कहते है ये एक प्रकार के P-N जंक्सन दीदी होते है। जो पारदर्शक (Transparent) मैटीरियल का बना होता है जिसके कारण जंक्शन के बीच इलैक्ट्रॉन्स तथा होल्स के संयोजन से प्रकाश उत्सर्जित होता है । जिससे इनमे रंग के अनुरूप चमक पैदा होती है इनका उपयोग विभिन्न प्रकार के इलैक्ट्रोनिक्स खिलौनो इलैक्ट्रोनिक या डिजिटल घड़ियों कैल्कुलेटर्स इंत्यादि उपकरणों में किया जाता है ।

4- वैरेक्टर डायोड (Varactor Diode)-

इस डायोड के अंतर्गत P-N जंक्शन के बीच एक कैपेसिटर बन जाता है जिसकी कैपासिटी रिवर्स बायस के वोल्टेज के साथ बदलती है । इसका उपयोग विभिन्न उपकरणों जैसे कलर टी.वी. रिसीवर्स के इलैक्ट्रोनिक ट्यूनर सैक्शन में L-C टयून्ड सर्किट्स की वोल्टेज को स्वतः घटाने-बढ़ाने के लिए किया जाता है ।

5- टनल डायोड (Tunnel diode) –

टनल डायोड भी एक प्रकार का P-N जंक्शन डायोड ही है। परंतु इसमे एम्प्योरिटीज की अधिक मात्रा में डोपिंग कराई जाती है । एम्प्योरिटीज (Impurities) की मात्रा अधिक होने के कारण जंक्शन ब्रेक डाउन आसानी से हो जाता है और डिपलिशन लेयर (Depletion Layer) की मोटाई कम हो जाती है यह डायोड फारवर्ड बायस में कार्य करते है। इसमें ऋणात्मक प्रतिरोध होने के कारण फारवर्ड वोल्टेज बढ़ाने पर धारा का मान एक निश्चित वोल्टेज पर कम हो जाता है। ततपश्चात बढ़ता है इनका उपयोग हाई फ्रीक्वेन्सी सर्किट्स में स्विचिंग के लिए कंप्यूटर्स तथा विभिन्न लॉजिक सर्किट्स में किया जाता है ।

6 . -लेज़र डायोड | Laser Diode-

लेज़र डायोड इंजेक्शन लेजर डायोड के नाम से भी काफी प्रचलित है यह डायोड Light Emitting Diode की तरह काम करता है लेकिन उसमें इस्तेमाल होने वाली लाइट के बजाय यह एक लेजर बीम बनाता है।लेज़र डायोड का इस्तेमाल इन दिनों बारकोड रीडर, लेजर प्वाइंटर्स और फाइबर ऑप्टिक के अलावा भी कई अन्य कार्यों में किया जाता है।

7.-Shockley Diode-

इस डायोड को 1950 में William Shockley ने बनाया था। इस डायोड में 4 लेयर होती है जोकि सेमीकंडक्टर मैटेरियल से बनी होती है। इसको PNPN डायोड भी कहा जाता है। यह डायोड बिना गेट टर्मिनल के किसी थियोरिस्टर के समान होता है।

जिसका मतलब है की गेट टर्मिनल को पूरी तरह से काट दिया जाता है। जिस कारण उसके पास कोई ट्रिगर इनपुट्स नहीं होते हैं और उसको वोल्टेज को आगे भेजने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता है। इस डायोड में दो ऑपरेटिंग स्टेट्स होती हैं जिसे कंडक्टिंग और नॉनकंडक्टिंग कहा जाता है। non-conducting स्टेट में डायोड को काफी कम वोल्टेज में चलाया जाता है.

8.-Vaccum Diode-

इस डायोड में दो इलेक्ट्रोड लगे होते हैं जिनको कैथोड और एनोड कहा जाता है। यह डायोड टंगस्टन का बना होता है जिस वजह से वह इलेक्ट्रॉन को छोड़ता है और वह इलेक्ट्रॉन एनोड की तरफ जाता है जिस वजह से यह एक स्विच की तरह काम करता है। अगर कैथोड में मेटल ऑक्साइड की परत लग जाए तो इलेक्ट्रॉन को छोड़ने की उसकी काबिलियत ज्यादा हो जाती है।

Diode कैसे काम करता है?

दोस्तों Diode के प्रकार और इसके उपयोग को समझने के बाद अब हम यह समझते है कि आखिर यह इलेक्ट्रॉनिक उपकरण काम कैसे करता है। तो बता दें डायोड forward-biased & reverse-biased पर काम करता है।

जब डायोड forward-biased पर काम करता है तो करंट anode से cathode की तरफ flow करता है। वहीं दूसरी तरफ जब डायोड REVERSE-BIASED में काम करता है तो इस दौरान करंट cathode से anode की और फ्लो होता है। चलिए एक पॉपुलर PN इंजेक्शन का एक उदाहरण से इसकी कार्यप्रणाली को समझते है।

यदि diode forward-biased पर है तो इसका मतलब p-type region voltage के पॉजिटिव टर्मिनल से कनेक्टेड होता है जबकि n-type negative टर्मिनल से कनेक्टेड होता है। इस स्थिति में इलेक्ट्रॉनिक्स टर्मिनल के साथ अटैच होते हैं और P टाइप के साथ एक संयोजी बोंड बनाते हैं।

अतः इस प्रकार कहा जा सकता है कि PN junction डायोड एक शॉर्ट सर्किट की तरह काम करता है।वहीं दूसरी तरफ यदि डायोड reversed bias में होता है तो P type reason positive टर्मिनल के साथ कनेक्ट होता है और N type reason नेगेटिव टर्मिनल के साथ कनेक्टेड रहता है। इस स्थिति में p-type के रीज़न के साथ सभी इलेक्ट्रॉन अटैच होते हैं।

Diode के उपयोग क्या है –

Diodes का इस्तेमाल कई कार्यों के लिए किया जाता है जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं –

  • Diodes का प्रयोग rectifiers के रूप में किया जाता है
  • इनका प्रयोग Clipping circuit के रूप में किया जा सकता है
  • इनका प्रयोग Logic gates में किया जाता है
  • Diodes का इस्तेमाल reverse current से protection के रूप में भी किया जाता है

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निकर्ष-

  • जैसा की आज हमने आपको के Diode Kya Hai, , Diode की खोज किसने की, Diode खोज कब हुयी थी, Diode कितने प्रकार के होते है, Diode कैसे काम करता है, Diode के उपयोग क्या है के बारे में आपको बताया है.
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